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वहगुल नदी में अवैध खनन से बढ़ा खतरा, ग्रामीणों ने जताई कटान और बाढ़ की आशंका

फतेहगंज पश्चिमी। वहगुल नदी के किनारे हो रहे कथित अवैध खनन को लेकर ठिरिया खेतल, मनकरी और आसपास के गांवों के लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारों से लगातार मिट्टी निकाले जाने के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बदल रहा है, जिससे आगामी बरसात में कटान और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार, नदी क्षेत्र में भारी मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जा रहा है। इससे नदी के किनारों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और नदी की धारा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बरसात के दौरान नदी का बहाव गांवों की ओर मुड़ सकता है, जिससे कृषि भूमि और आबादी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

भारतीय किसान यूनियन के नेता सुधीर बालियान ने बताया कि लगातार खनन से नदी किनारे की संरचना कमजोर हो रही है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और कई गांव कटान की चपेट में आ सकते हैं।

पिछले वर्ष भी हुआ था नुकसान

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष नदी के कटान से पिपरिया और कनपुर क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ था। कई किसानों की जमीन नदी में समा गई थी और खेतों को भारी क्षति पहुंची थी। इसी कारण इस बार भी लोग संभावित खतरे को लेकर चिंतित हैं।

मंदिर मार्ग की हालत भी खराब

अवैध खनन में लगे भारी वाहनों की आवाजाही से ठिरिया खेतल स्थित भट्टा वाले महाराज मंदिर तक जाने वाला मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क पर बने गड्ढों और उड़ती धूल के कारण श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी क्षेत्र का सर्वे कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने तथा संभावित कटान वाले स्थानों का निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन पर है कि वह बरसात से पहले स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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