112 वर्षीया शांति गुप्ता का निधन, गांव में पसरा मातम
ग्राम मीरापुर की सबसे बुजुर्ग महिलाओं में शामिल 112 वर्षीया शांति गुप्ता का निधन

फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के ग्राम मीरापुर की सबसे बुजुर्ग महिलाओं में शामिल 112 वर्षीया शांति गुप्ता का निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए दूर-दूर से रिश्तेदार, शुभचिंतक और गांव के सैकड़ों लोग उनके आवास पर पहुंचे। घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही और हर कोई नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि देता नजर आया।
शांति गुप्ता अपने पीछे एक बड़ा भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई पीढ़ियों को बढ़ते हुए देखा। परिवारजनों के अनुसार उन्हें परनाती से भी आगे की पीढ़ी देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवनकाल में पुराने दौर से लेकर आधुनिक समय तक समाज में आए अनेक बदलावों को बहुत करीब से देखा था।
उनका जीवन सादगी, संस्कार और परिवार के प्रति समर्पण की मिसाल माना जाता था। गांव की महिलाएं उन्हें परिवार को जोड़कर रखने वाली और धार्मिक विचारों वाली महिला के रूप में याद करती हैं। वह हमेशा लोगों को प्रेम, एकता और आपसी भाईचारे का संदेश देती थीं। उनकी बातों और अनुभवों का गांव के लोग सम्मान करते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि शांति गुप्ता ने अपने जीवन में सुख-दुख, संघर्ष और बदलते समय के हर दौर को बहुत धैर्य और मजबूती के साथ जिया। उनके अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत थे। वह अक्सर बच्चों और युवाओं को परिवार की अहमियत, बड़ों के सम्मान और संस्कारों की सीख दिया करती थीं।
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। परिवार के हरिओम गुप्ता, संतोष गुप्ता, सतीश गुप्ता, पप्पू गुप्ता, संजय गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सुशील गुप्ता, संदीप गुप्ता, सुदीप गुप्ता, आशीष गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, ऋषि गुप्ता, रूबल गुप्ता, ऋषभ गुप्ता, वरुण गुप्ता, गौरव गुप्ता, सौरभ गुप्ता, सुलभ गुप्ता, राम गुप्ता, सुमित गुप्ता, दीपक गुप्ता, कुलदीप गुप्ता, हिमांशु गुप्ता और शुभम गुप्ता सहित अन्य परिजन मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
गांव के लोगों ने कहा कि शांति गुप्ता जैसी बुजुर्ग और अनुभवी महिला का जाना समाज और परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके संस्कार, स्नेह और आशीर्वाद को लोग हमेशा याद रखेंगे।


