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बरेली पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, महिलाओं के सम्मान में करी वार्ता 

आज भारतीय जनता पार्टी बरेली द्वारा सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता आयोजित की गई जिसमें मुख्य अतिथि मा0 श्री केशव प्रसाद मौर्य जी, उपमुख्यमंत्री उ0 प्र0 सरकार ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा 16 और 17 अप्रैल को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपने महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्पष्ट कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने विपक्ष के झूठ को बेनकाब करते हुए स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहगेा और बढ़ेगा। समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना मात्र है।

भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ाई लड़ेगी।

16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन

विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए।

भारतीय जनता पार्टी 16 और 17 अप्रैल को संसद में पूरे देश ने जो शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी आचरण विपक्षी गठबंधन का देखा, उसकी कड़ी निंदा करती है। इन दलों ने केवल संवैधानिक संशोधन या परिसीमन से जुड़े विधेयकों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारत की करोड़ों माताओ, बहनों और बेटियों के साथ विश्वासघात किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है, ये दल राजनीतिक बहानों और देरी की दीवारें खड़ी कर देते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा दशकों तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने की साजिश इन दो दिनों की बहस में एक बार फिर उजागर हो गई।ये दल लोकतंत्र के रक्षक होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टि करण के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं।

विपक्ष के इस महिला-विरोधी रवैये के खिलाफ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने सच्चाई रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में निर्णय लेने का समय है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में हिस्सा देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक बंधक बनाए रखा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने यह भी कहा कि जब सभी दल एक साथ आते हैं तो ऐसे मुद्दे राजनीतिक नहीं रह जाते और देश को लाभ होता है। उन्होंने हर सांसद से व्यक्तिगत और दलगत हितों से ऊपर उठने की अपील की।जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, तब इन विपक्षी दलों ने चुनावों के दबाव में उसका समर्थन किया, लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तो उनकी महिला-विरोधी सोच खुलकर सामने आ गई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने चेतावनी दी कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैः वे सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। आज लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं और निर्णय ले रही हैं और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ऐसे में इस ऐतिहासिक अवसर को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति का गला घोंटना है, और इसके जिम्मेदार लोगों को हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के झूठ के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन विधेयकों का मूल उद्देश्य “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के संवैधानिक सिद्धांत को प्रभावी ढंग से लागू करना है। परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसे लंबे समय से टाला गया, जिससे प्रतिनिधित्व में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हुआ है।

गृहमंत्री ने साफ कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों का विरोध प्रक्रिया या तरीके को लेकर नहीं, बल्कि महिलाओं को आरक्षण देने के मूल विचार के प्रति उनकी असहमति से प्रेरित है। इतिहास गवाह है कि जिसने शाह बानो मामले में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया और तीन तलाक जैसी प्रथा का समर्थन किया, वह महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने के विचार को स्वीकार नहीं कर सकता।

कांग्रेस ने दशकों तक तकनीकी बहानों, समितियों और खोखली बहसों के माध्यम से महिला आरक्षण को लंबित रखा और जब भी पिछड़े वर्गों को अधिकार देने की बात आई, उसने आयोगों की रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देना उनके लिए आसान था क्योंकि वहां उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति प्रभावित नहीं होती थी, लेकिन संसद में उन्होंने दरवाजे बंद रखे। परिसीमन का उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जनसंख्या के अनुपात मे संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लेकिन अपने घटते जनाधार से घबराए डीएमके और उसके सहयोगी अब देश में उत्तर-दक्षिण विभाजन का खेल खेल रहे हैं।ये दल यह झूठा प्रचार कर रहे हैं कि परिसीमन से दक्षिण भारत को नुकसान होगा, जबकि गृहमंत्री ने तथ्यों के साथ स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की इस साजिश में समाजवादी पार्टी ने भी धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर खतरनाक कदम उठाया है, जबकि भारत का संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता। टीएमसी की भी पोल खुल गई है जो पार्टी अपने राज्य में महिलाओं की आवाज को हिंसा के जरिए दबाती है, वही संसद में लोकतंत्र की बात कर रही थी। विपक्ष यह नजर अंदाज कर रहा है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन सीधे परिसीमन से जुड़ा है परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी है। इसलिए इन विधेयकों का विरोध करना वास्तव में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है।

विपक्ष को लगता है कि वह तकनीकी बहानों से जनता को भ्रमित कर सकता है, लेकिन आज की महिलाएं सब समझती हैं। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति विपक्ष की हताशा का प्रदर्शन था। कांग्रेस और उसके सहयोगियों को डर है कि यदि महिलाओं को उनके ऐतिहासिक अधिकार मिल गए, तो उनकी बची-खुची राजनीतिक जमीन भी खिसक जाएगी। भाजपा महिला सशक्तिकरण, संतुलित प्रतिनिधित्व और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराती है। यह विभाजन या भ्रम पैदा करने का समय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एकजुट होने का समय है।प्रधानमंत्री मोदी जी कि सरकार महिलाओं के अधिकारों के लिए इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी, ताकि देश की आधी आबादी को उसका हक मिल सके। आने वाले समय में भारत की महिलाएं अपने वोट की ताकत से इन अहंकारी और महिला-विरोधी दलों को राजनीति के हाशिये पर पहुंचा देंगी।

प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अरुण कुमार सक्सेना, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार,जिला पंचायत अध्य्क्ष रश्मि पटेल, एमएलसी बहोरन लाल मौर्य,महाराज सिंह, विधायक संजीव अग्रवाल, डॉ डी सी वर्मा, डॉ एमपी आर्य, डॉ राघवेंद्र शर्मा, मेयर उमेश गौतम, जिला अध्य्क्ष सोमपाल शर्मा, अधीर सक्सेना, आदेश प्रताप सिंह, श्रुति गंगवार, राम गुप्ता, दीप्ति भारद्वाज, नीलम जेठा, डॉ तृप्ति गुप्ता, चंचल गंगवार, नेहा कन्नौजिया, डॉ मीनाक्षी गंगवार, मीडिया प्रभारी अंकित माहेश्वरी व बंटी ठाकुर आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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