जीएसटी की विसंगतियों पर व्यापारियों का प्रदर्शन, वित्त मंत्री को भेजा 12 सूत्रीय मांगपत्र।

बरेली। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश ने जीएसटी व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों, व्यापारियों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम 12 सूत्रीय मांगपत्र भेजा। यह मांगपत्र एडिशनल कमिश्नर, जीएसटी ग्रेड-1, बरेली के माध्यम से प्रेषित किया गया।

जिला अध्यक्ष अकरम खान के नेतृत्व में सौंपे गए मांगपत्र में कहा गया कि जीएसटी विभाग के अधिकारी तकनीकी त्रुटियों और मानवीय भूलों को आधार बनाकर व्यापारियों पर अनावश्यक जुर्माना लगा रहे हैं। इससे ईमानदार व्यापारियों का उत्पीड़न होने के साथ-साथ भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है। संगठन ने मांग की कि जहां सरकार का पूरा कर जमा हो चुका हो, वहां केवल तकनीकी कमियों के आधार पर कार्रवाई और जुर्माना लगाने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
व्यापार मंडल ने 40 लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों को अनिवार्य रूप से जीएसटी पंजीकरण कराने के लिए बाध्य किए जाने पर भी आपत्ति जताई। साथ ही एसआईबी जांच और सर्वे के दौरान दबाव बनाकर कर जमा कराने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
मांगपत्र में जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा का दायरा बढ़ाने, डिजिटल कार्यों के लिए निःशुल्क लैपटॉप एवं आवश्यक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने तथा कर भुगतान में विलंब होने पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत ब्याज को घटाकर अधिकतम 6 प्रतिशत करने की भी मांग की गई।
संगठन ने जीएसटी अधिनियम में जेल की सजा समाप्त कर इसे केवल आर्थिक दंड तक सीमित करने का सुझाव दिया। इसके अलावा तंबाकू पत्ते और तैयार तंबाकू पर अलग-अलग जीएसटी दरों को स्थानीय व्यापार और सरकारी राजस्व के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की गई।
व्यापारियों ने कच्चे और तैयार माल पर अलग-अलग जीएसटी दरों के कारण फंसी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) एवं रिफंड की राशि रिटर्न दाखिल होने के बाद स्वतः व्यापारी के खाते में स्थानांतरित करने तथा विलंब होने पर 18 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की मांग भी उठाई। साथ ही ई-वे बिल-2 के मामलों में माल को डबल सेल मानकर कार्रवाई पर रोक लगाने और पैकिंग सामग्री पर अधिक जीएसटी के कारण मिलने वाले आईटीसी का पूरा लाभ व्यापारियों को उपलब्ध कराने की मांग की गई।
जिला अध्यक्ष अकरम खान ने कहा कि व्यापारियों और उद्योगों से जुड़ी इन समस्याओं का शीघ्र समाधान होने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, अनावश्यक विवाद कम होंगे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
इस दौरान प्रदीप गर्ग, डॉ. मुदित प्रताप सिंह, परवेज आलम, राजेश कुमार दिवाकर, गौरव गर्ग, जावेद सलमानी, प्रदीप, कमल गुप्ता सहित अनेक व्यापारी पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।




